निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही: राम भरोसे विभाग

निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही: राम भरोसे विभाग

निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही
निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही

निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही: राम भरोसे विभाग

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निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही: राम भरोसे विभाग [News VMH-Uttar Pradesh] उत्तर प्रदेश के निबन्ध विभाग ( स्टाम्प और पंजीकरण विभाग)  में अभी कुछ समय पहले तक रोजनदारी पर, प्राइवेट कर्मचारियों से काम कराया जाता था। ये प्राइवेट कर्मचारी निबंधन विभाग के ऑन रोल कर्मचारियों के साथ मिलकर निबंधन विभाग का कार्य करते थे। जिससे निबंधन विभाग के ऑन रोल कर्मचारियों पर कार्य का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता था।

सचिव स्तर से आया था आदेश

काम सही प्रकार चल रहा था तभी अकस्मात शासन स्तर, लखनऊ से एक आदेश पारित किया गया, आदेश में यह बोला गया कि, निबंधन विभाग में कार्यरत प्राइवेट कर्मचारियों के विरुद्ध लगातार भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हो रहीं हैं। जिसके चलते निबंधन विभाग में जितने भी कर्मचारी प्राइवेट तौर पर कार्यरत हैं, उनको कार्य से हटा दिया जाए।

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आदेश का किया गया अनुपालन

आदेश का अक्षरंश अनुपालन करते हुए, निबंधन विभाग में कार्य करने वाले प्राइवेट कर्मचारियों को हटा दिया गया। प्राइवेट कर्मचारियों को हटाने से ही निबंधन विभाग ने इतिश्री कर ली। किसी भी प्राइवेट कर्मचारी की कोई जांच कराना निबंधन विभाग ने उचित नहीं समझा। कई लोग जो सच में भ्रष्टाचार में संलिप्त थे, वह नौकरी से हाथ धोने के बाद भी, भ्रष्टाचार से प्राप्त पैसे के बल पर आलीशान जीवन व्यतीत कर रहे हैं। लेकिन वो व्यक्ति जो प्राइवेट तौर पर निबंधन विभाग में सेवा देते समय ईमानदारी से कार्य कर रहे थे, आज दाने दाने के लिए मोहताज हैं।

क्यों नहीं की गई भ्रष्टाचार की जांच

जब निबंधन विभाग को यह जानकारी हो गई थी, कि प्राइवेट रूप से कार्यरत कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं, तो उनकी सूची अपने मातहतों से प्राप्त कर जाँच क्यों नहीं कराई गई। ये सब भूलवश हुआ या इसके पीछे कोई कारण था, ये समझ से परे है।

जमीन खरीद में लगा है भ्रष्टाचार का पैसा

जो भ्रष्टाचार की सूचना विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुँची थी वो गलत नहीं थी। अगर निबंधन विभाग प्राइवेट तौर पर कार्यरत कर्मचारियों की जाँच कराएगा, तो आय से अधिक संपत्ति अवश्य मिलेगी और भ्रष्टाचार में संलिप्त अपराधियों को सबक मिलेगा। अगर निबंधन विभाग सच में इस समस्या के चलते परेशान था तो उसे उचित कार्यवाही करनी चाहिए थी न कि हीला हवाली। एक अनुमान के अनुसार इस भ्रष्टाचार के माध्यम से भ्रष्टाचारियों ने करोड़ों रुपए कमाए हैं, जिनका उपयोग जमीन खरीद में सबसे अधिक किया गया है।

अब देखना यह है कि इन निबंधन विभाग के भ्रष्टाचारियों पर कब होगी कार्यवाही ?

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